ये 2024 था या कोई सपना|| बचपन का love 2024 में किसी और की हो गई|| प्यार में मिला एक शबक

 जब 2024 आया तो वो भी आई और जब 2024 गया तो वो भी चली गई कहानी बस इतनी सी है।

ये बात उस समय की जब वर्ष 2024 का नया साल चल रहा था और मैं अपने गांव में इसे सेलिब्रेट कर रहा था | 

 जनवरी महीने के महज कुछ ही दिन गुजरे थे एक दिन सुबह थोड़ा ठंडा ख़तम होने के बाद करीब 10:30 बजे मैं घर से किसी काम के लिए 10 किलोमीटर दूर एक दोस्त के साथ बाइक से जा रहा था करीब हम आधा सफर पूरा हो चुका था तभी किसी ने रास्ते में हमें रुकने के लिए इसरा किया और कुछ कहा पर मेरा ध्यान ही नहीं गया लेकिन मेरा दोस्त जो बाइक चला रहा था उसने ध्यान दिया और आगे जाकर  उसने बाइक रोका और हम पीछे वापस आए तो मैंने देखा कि कोई लड़की हमें रुका रही थी। उसने मास्क लगा रखा था पास जाने पर पता चला कि हम एक दूसरे को पहले से ही जानते हैं उसका नाम काजल था ।  insta id- its_jaanu9670  ladali_ladoo_quinn, https://www.instagram .com/its_jaanu9670 ?igsh= M2J3M3B4eDFoc3Ri

मैंने उससे पूछा तो उससे बताया कि वो इसी कॉलेज में बीए फाइनल ईयर में पढाई करती है और हम लोग उसके कॉलेज के बाहर थोड़ी ही दूर पर थे। करीब 7 - 8 साल से हम एक दूसरे को जानते थे और काफी लंबे समय के बाद हम एक दूसरे से मिल रहे हैं जब हम पहली बार 7 साल पहले मिले थे तभी हमारे अंदर एक दूसरे के लिए भावनाएं feelings थीं और हमने एक दूसरे को बताया भी था और हमारी फोन पर भी बातें हुई थीं पर तभी के समय में रिचार्ज थोड़ा महंगा था और हमारे पास ज्यादा फोन भी नहीं रहता था तबी वो 8वीं कक्षा में पढ़ रही थी उसने बताया कि वह स्कूल और पढ़ाई में बिजी हो गई थी मैंने भी उसे परेशान नहीं किया आज सालो बीत गए मुझे लगा कि वह मुझे भूल गई है या फिर क्या पता उसकी जिंदगी में कोई और ही आ गया होगा। 

थोड़ी देर बात करने के बाद उसने मेरा फोन नंबर लिया और bye बोल मैं वहां से चला गया करीब 2 घंटे बाद फोन उसका फोन आया तो मैं कुछ काम कर रहा था इसलिए 1-2 मिनट बाद फोन रख दिया 

फिर अगले दिन से हम काफी समय एक दूसरे से फोन पर बात करते थे और मैं उसके कॉलेज पर एक-दो बार मिलने भी गया और उसके गांव के बाहर उसे ड्रॉप भी किया फिर कुछ दिन बाद मैं मुंबई चला गया। वहां 10 दिन रहने के बाद उसने मुझे बताया कि उसकी शादी के लिए घर वाले लड़के देख रहे हैं बस इसी बात को लेकर हमारे बीच थोड़ा झगड़ा हो गया और हमने बात करना ही बंद कर दिया। फिर 3 से 4 दिन बाद मैं वापस अपने गांव आ गया और कॉल किया तो उसने बोला कि उसका रिचार्ज खत्म हो गया था इसिलिये वह फोन नहीं कर पा रही थी और आज इनकमिंग कॉल का भी आखिरी दिन हैं अच्छा हुआ कि अपने call किया फिर से हमारी बातें होने लगीं और मिलने लगे उसके कॉलेज से थोड़ी ही दूर पर एक चौराहे पर मेरी बहन के हसबैंड का एक कपडे की दुकान थी वहां भी हम एक बार मिले थे। ऐसे ही दिन बितते गए एक रात में फोन पर बात करते हुए उसे मिलाने के लिए कहा तो उसने मुझे अपने घर के बाहर मिलाने के लिए बुलाई पर घर से बाहर नहीं आई बल्की मुझे ही उल्टा अपने घर ले गई मुझे बहुत डर लग रहा था लेकिन उसने मुझे ऐसी जगह पर ले गई जहां मेरा डर थोड़ा कम हो गया तब समय रात के करीब 11:30 हो रहे थे मेरा गला सुख रहा था तो उसने मेरे लिए पीने के लिए पानी लेकर आई। फिर करीब 2 घंटे बाद मैं वापस अपने घर आ गया । फिर कुछ दिन बाद में उसके कॉलेज गया तो मैंने उसे बताया कि यहीं पास के गांव में मेरा एक घर है जहां पर अभी फ़िलहाल कोई नहीं रहता है चलो वहां पर चलते हैं तो वो मेरे साथ वहां आ गई ऐसे ही एक-दो बार हम वहां मिले।

फिर कुछ दिन बाद मैं बेंगलुरु चला गया मेरे भांजे का एग्जाम दिलवाना था और मुझे वहां Job (नौकरिय, काम) भी करना था मैं वहां से इतनी जल्दी तो आने वाला नहीं था।

 जब उससे बात होती थी तो वो मुझे वापस आने के बोलती नियति  का खेल देखिये मुझे 10 दिन के बाद ही वापस गांव आना पड़ गया। और आने के एक दिन बाद ही मैं उसके पड़ोस में एक दोस्त के बहन की शादी में गया वो भी वहां आई थी मुझे देख वो सरप्राइज हो गई क्योंकि मैं उसे बिना बताए ही वहां चला गया था। वह बहुत खुश थी हमे किसी ने नोटिस किया या नहीं किया मुझे नहीं पता। 

फिर एक दिन बाद मैं अपनी माँ के साथ हरिद्वार मेरे मामा के लड़के की शादी में चला गया हरिद्वार जाने में मेरे यहां से करीब पूरा 1दिन लग जाता है मैं उसे बिना बताए ही चला गया था इसलिए वह गुस्सा हो रही थी और मुझे जल्दी से जल्दी वापस आने के लिए बोल रही थी क्योंकि उसके बड़े पापा की लड़की की शादी थी वो भी उसी दिन जिस दिन यहां शादी थी मैं फंस गया था क्योंकि मैं मां को छोड़कर जा भी नहीं सकता था। मैं नहीं गया इसे वहां थोड़ा गुस्सा भी हो गई , हरिद्वार हम पहली बार गए थे इसलिए हम वहां के कुछ  (locations ) स्थान पर घुमने तथा तीर्थ स्थानों, घाटो 🏞️ पर स्नान आदि के लिए भी गए थे https://www.instagram.com/reel/C6iaAWVyeea/?utm_source=ig_web_copy_link&igsh=MzRlODBiNWFlZA== लक्ष्मण झूला ऋषिकेश के मध्य में स्थित है और इसके आसपास कई आकर्षण स्थल हैं, जिनमें राम झूला, त्रिवेणी घाट, नीर गढ़ झरना और विभिन्न योग केंद्र और आश्रम शामिल हैं।

फिर 3 से 4 दिन बाद हम लोग शादी बिता कर वापस आ गये। एक दिन जब मैं उससे बात कर रहा था तो मैं किसी मार्केट में अपने दोस्तों के साथ पानी पूरी खा रहा था तो उसने मजाक में कहा मुझे भी खाना है  तो मैंने उसके लिए सच में पार्सल करवा लिया और उसके घर से थोड़ी ही दूर एक दुकान पर बुलाकर उसे दे दिया मेरा ऐसा करना शायद उसे अच्छा लगा उसने मुझे फ़ोन पर thank you बोला और kiss😘💋 किया। 

 अब मैं शायद ही उसे अपनी तरफ से कभी कॉल करता था पर वह मुझे बहुत ज्यादा कॉल करती थी जब मैं कॉल रिसीव नहीं करता था तो वो मेरे दोस्त के पास कॉल करके रोने लगती थी और मुझसे बात करने के लिए कहते थी। और जब मुझसे बात करती तो फिर रोने लगती वो कहती थी आपको क्या हो गया है आप ऐसा क्यों कर रहे हो बात क्यों नहीं कर रहे हो तो मैं कहता था कि मैं दिन में बस 10 मिनट ही तुमसे बात कर पाउंगा लेकिन वो नहीं मानती थी और बात करने की जिद करती फिर रोने लगती।

फिर थोड़े दिन बाद वो अपने मामा के यहां उनकी लड़की के जन्मदिन🎂🎉 में गई थी तो उसने मुझे भी बुलाया था, उसके मामा भी मेरे रिश्तेदार है वो भी मुझे आने के लिए बोल रहे थे लेकिन मैं नहीं गया क्योंकि मुझे डर था कि हमारे बारे में किसी को पता ना चल जाए। बर्थडे बीत जाने के 2 दिन बाद भी वो वही थी। उसके मामा के घर के पड़ोस में मेरी दीदी का भी घर है। मुझे तो याद नहीं था पर उसने मुझे बताया कि मेरी दीदी की लड़की का आज जन्मदिन है फिर मैंने उसे कहा कि किसी से पूछ कर कन्फर्म करो फिर उसने पता किया तो सच में उसका जन्मदिन 🎂था। फिर मैं वहां चला गया गर्मी का दिन था इसलिए मैं उसके लिए कोल्ड ड्रिंक लेकर गया था ।

शाम को जन्मदिन की पार्टी ख़त्म होने के बाद उस रात हम पहली रात की तरह वही पर मिले पर इस बार ठंडी नहीं गर्मी का मौसम था और पसीना💦 पूछो मत फिर सुबह मैं घर चला आया। करीब 1 हफ्ते बाद मैं उसके कॉलेज गया था और वही पास के गांव में जो मेरा घर था वहां पर मिले 3 से 4 दिन का गैप देकर शायद दो बार मिले और एक बार नहीं मिल पाये थे क्योंकि उसका एक्टिवा🛵 ख़राब हो गया था।

 एक दिन मैंने सोचा कि गांव में काफी टाइम हो गया है अब मुझे बाहर जाना चाहिए। घर वाले भी बोल रहे थे मैं मुंबई जाने वाला था लम्बे समय के लिए पर शायद मेरी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। इधर उसे मिले हुए भी थोड़ा वक्त हो चुका था और वह मुझे बुला रही थी मिलने के लिए क्योंकि उसके कॉलेज का आखिरी दिन चल रहा था। और बीए फाइनल का आखिरी एग्जाम चल रहा था और एक बार परीक्षा ख़त्म हो जाती है तो शायद पता नहीं फिर हम कब मिलेंगे। लेकिन मैं 3-4 दिन से  किसी ना किसी काम का बहाना देकर माना कर देता था पर 12 मई को आख़िर मे जाना ही पड़ा पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा था कि कुछ तो बुरा होने वाला है कहीं ये हमारी आख़िर मुलाक़ात न बन जाए। ऐसा लग रहा था जैसे कोई मुझे वहां जाने से रोक रहा हो। 

  क्योंकि उसके पास जाने के लिए मेरे पास कोई साधन भी नहीं था 2-4 दोस्तों से भी बात की पर कुछ नहीं मिला बाद एक दोस्त ने मुझे अपनी नई साइकिल दी और मैंने चल दिया ( आज से 10 साल पहले मेरेसे इसी लड़के की साइकिल कहीं खो गई थी और मुझे उसके बदले में अपनी साइकिल देनी पड़ी थी।)😴

हम मेरे उसी घर पे मिलने वाले थे जहां पहले मिले थे और वो सीधे वही आ रही थी। मैं वहां पहले पहुंच गया और घर का ताला खोल कर बाहर कुछ लेने के लिए चला गया फिर मैंने कॉल करके बोल दिया कि तुम आना तो सीधे अंदर जाके दरवाजा बंद कर लेना ! थोड़ी देर में जब वो पहुची तो मुझे कॉल की बोली एक औरत और एक लड़की  पड़ोस से आई है और कुछ सामान अंदर रखना चाहती है वो लोग आपकी दीदी से फोन पर बात कर चुकी हैं मुझे कुछ समझ में नहीं आया घर तो दीदी का ही है लेकिन वो मुंबई में हैं मैंने बोल दिया ठीक है रखने दो।

 वो लोग समान रख कर चले गए तो मैंने उसे कहा कि तुम घर चली जाओ हम किसी और दिन मिल लेंगे तो उसने कहा कि आज मेरा आखिरी पेपर था आज के बाद में नहीं आऊंगी और मुझे भी दो-तीन दिन में मुंबई जाना था फिर मैं आ गया। उसने मेरे खाने के लिए समोसा या नूडल्स लिया था शायद याद नहीं। फिर थोड़ी देर मिलने के बाद हम लोग जाने के लिए तैयार हो चुके थे पता नहीं क्यू पर मुझे ये आखिरी मुलाकात लग रही थी  Maine use mention karke Instagram per ek story lagai thi वो लिखते मेरा हाथ काप रहे हैं फिर भी लिख रहा हूँ (कोई किसी के बिना नहीं मरता आदत की बात है तुम्हारी भी छूट जायेगी मेरी भी छूट जायेगी 😢यहीं तक था सफर अपना तुम्हें है लौट कर जाना कभी मैं आऊ तो..... )।


अपनी story मैने उसे सुनाई भी थी तो इस पर उसने रोते हुए कहा था कभी मत आना (हुआ भी यही) फिर इमोशनल हो गए। फिर थोड़ी देर बाद किसी के दरवाजे पर जोर लाट मरने की आवाज आई मैं बहार आकर देखा तो उसका भाई दरवाजे पर खड़ा था और शोर रहा था मैंने अंदर जाकर उसे यह बात बताई तो वह पूरी डर गई और छुपने के लिए उन्हें जगह ढूंढने लगी। मैंने कमरे का दरवाजा बाहर से लॉक कर दिया इधर उसका भाई मुख्य mein दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया और किसी को फोन करके बुलाने लगा। मैं भी मदद के लिए किसी अपने दोस्त को फोन ट्राई कर रहा था तभी उसके साथी भी पहुंचने ही वाले थे और थोड़ी दुर् पर रास्ता भूल रहे थे तो वह उन्हें लेने के लिए चला गया।
मैं दरवाजे के बाहर की कुंडी को अपनी उंगली से खोलने की कोशिश करने के लिए दरवाजे पर चला गया मैंने पहले ही दरवाजे के अंदर वाली कुंडी खोल दी और फिर बहार की खोलने की कोशिश करने लगा तभी मेरा फोन बजा मेरी मदद के लिए आने वाले लोग का फोन था वह यहां आने के लिए लोकेशन पूछ रहे थे मै बात करने के लिए दरवाजे से दूर एक खिड़की पर चला गया और अंदर से कुंडी लगाना भूल गया यहीं मेरी सबसे बड़ी गलती थी
 जब मैं बात कर रहा था तभी बहुत सारे लोग घर में अंदर घुस गए और मेरे ऊपर हमला करने लगे और उस कमरे का दरवाजा तोड़ना चालू कर दिया और मुझसे चाबी मांगने लगे फिर मुझसे चाबी ले लिया।मुझमें पर लगतार लाठी और डंडे से हमला करने लगे। तभी वहां आस-पास के घर के लोग भी आ गए धीरे-धीरे वहां पर भीड होने लगी मैने भिड में खड़े होकर देख रहे लोगों से कहा कि मुझे बचा ले पर उनमे से कोई बचाने नहीं आया आज उन्हें भी इस बात का अफसोस है। भीड को बढ़ता देख हम दोनों को वहां से ले जाने लगे लड़की को उसका भाई अपने घर लेकर गया और मुझे उन सभी लोगों ने जंगल में किसी सुनसन जगह पर ले कर गए और तब तक मारा जब तक मैं बेहोश नहीं हो गया बेहोश होने के बाद मुंह पर पानी के छीटे मार कर पानी पिलाकर होस आया  तो फिर से मरना चालू किया फिर जब उन्हें लगा कि मैं मरने वाला हूं तब मुझे अपने साथ बाइक पर बैठा कर वहां से निकल गए इधर सभी लोग मुझे ढूंढ रहे थे मेरे किसी रिश्तेदार ने उसके भाई के पास फोन किया तो वह मुझे लेकर उसके गांव की तरफ चलने लगा लेकिन सोहनपुर रोड के किनारे रास्ते में ही छोड़ कर वापस जाने लगा थोड़ी देर बाद फिर वापस आए और बाइक पर रख्कर मारते हुए आगे ले जाने लगा100 मीटर चलते मेरे वो रिश्तेदार उन्हें मिल गए उनसे उनका बहस और झगड़ा होने लगा कुछ रास्ते में चलते हुए लोगों ने मुझे जल्दी से जल्दी अस्पताल ले जाने के लिए कहा तो मुझे हॉस्पिटल ले जाया गया।


उसके बाद पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई लेकिन अमल नहीं मुझे फिर से किसी अच्छे अस्पताल में लेजाया गया काफी समय तक मेरा इलाज चला । घाटना के दो दिन बाद फिर से लड़की का फोन आया था मेरा हाल जानने के लिये, सबने बहुत बोला की वो अच्छी लड़की नहीं उसे बात मत करो बहुत बुरा भला कहा लोगों ने उसके बारे में पर मुझे कभी ऐसा नहीं लगा! 

Flashback आख़िर ऐसा हुआ कैसे ?

घर पर सामान रखने के लिए औरत के साथ जो लड़की आई थी उसने ही मेरी बहन को फोन किया था और बहन (दीदी) ने लड़की (Kajal)के मामा को फोन करके बोला और मामा ने लड़की के भाई को सब अपने और सगे संबंधि ही थे। 

(coincidence संयोग-

जो लड़की मेरे साथ थी उसका नाम काजल था और जिसने मेरे बारे में चुगाली की यानि खबर दी उसका भी नाम यही है इस घटना पर बहुत सारे मेरे रिश्तेदार बहुत सारे लोग मुझसे मिलने आए हैं और ये जो लड़की है वो भी मुझे व्हाट्सएप मैसेज करके 22 मई को जन्मदिन विश birthday wish की और हाल पुछा जो की इस घटना से पहले कभी नहीं हुआ था)  इस घाटना को लगभाग पांच से छः महीने बीत गए और अभी फ़िलहाल मैं मुंबई में हूँ नंबर ब्लॉक करने के बाद किसी दूसरे नंबर से महीने में दो से तीन बार काजल का फोन आता ही था। 
आज साल का आखिरी दिन है यानी 31 दिसंबर और आज से एक सप्ताह पहले 24/12/24  मुझे ये पता चला की वो काजल जो मुझसे प्यार करती थी या जिससे मैं प्यार करता था (बातें तो ऐसी करती थीं जैसे मेरे अलावा इस दुनिया में उसका कोई है ही नहीं) जिसके चक्कर में इतना सब कुछ हो गया मैं मरता-मरता बचा वो आज किसी और के साथ भाग गई और दो दिन बाद 26/12/24 को  उसने शादी भी कर ली मेरे पास उसकी फोटो भी आई है किसी और के नाम का सिन्दूर अपनी मांग में लगाए हुए।



  मेरे घर वालों उसे कभी स्वीकार नहीं करते लेकिन क्या उसने अच्छा किया इस पर मैं क्या कहूं फिर भी वो खुश है तो सब ठीक है।👍 ये मेरी काजल के साथ की पूरी एक साल की कहानी है ।

*Bye 👋 kajal*

Good bye 👋 2024

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Comments

  1. Heart touching story bhai ek dum rula diya bhai ispe movie create hona chahiye 😩

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